नान एक किफ़ायती स्टोर पर अपने पति के ब्रिटिश चचेरे भाई, ताईजी से मिलती है। दोनों ताईजी को अपने घर बुलाते हैं। लंबे समय से प्रतीक्षित पुनर्मिलन से बेहद खुश एक ब्रिटिश व्यक्ति के साथ, ताईजी, नान के पास पहुँचती है। नान ताईजी के निमंत्रण को लगातार ठुकराती रहती है, लेकिन वह ताईजी की बढ़ती हुई इच्छा से बच नहीं पाती...
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