युकिको (सारा) और कुमी (ओइशी) हमेशा खुशी-खुशी रहीं। कुमी अगले दिन विदेश में पढ़ाई के लिए जा रही थी, इसलिए वह अपनी माँ, युकिको और पिता के लौटने का इंतज़ार कर रही थी। तभी फ़ोन की घंटी बजी। मेरे पिता का फ़ोन था। "कंपनी दिवालिया हो गई है," उन्होंने कहा। परिवार की खुशियाँ मानो काँप उठीं...
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