मुक्ति या पतन? जिस क्षण आप अपने शरीर को भुगतान के बदले बेचते हैं, उसी क्षण से अपरिहार्य वास्तविकताओं का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस लेन-देन का अंतिम परिणाम हमेशा एक ही होता है: अंततः अपने शरीर को भुगतान के बदले बेचने की वास्तविकता में समा जाना।
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